भारतीय संविधान के प्रमुख निर्माता और स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर का निधन 6 दिसंबर 1956 को हुआ था। उन्हें वर्ष 1990 में मरणोपरांत भारत रत्न दिया गया। यही कारण है कि डॉ. भीमराव आंबेडकर का परिनिर्वाण दिवस हर साल उनकी पुण्यतिथि 6 दिसम्बर को श्रद्धांजलि और सम्मान देने के लिये मनाया जाता है। इस वर्ष भी 63 वें परिनिर्वाण दिवस की बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भव्य तैयारियां की हैं। पूरे प्रदेश सहित राजधानी लखनऊ के प्रमुख चौराहे निले रंग में रंगे हुए नजर आ रहे हैं। लखनऊ के गोमतीनगर आंबेडकर मैदान, वूमेन पॉवर लाइन 1090 चौराहा, कांशीराम स्मारक, रमाबाई आंबेडकर मैदान झंडो और बड़े-बड़े होर्डिंग्स से पटे हुए नजर आ रहे हैं। परिनिर्वाण दिवस की तैयारियां भव्य तरीके से की गई हैं।

[penci_blockquote style=”style-1″ align=”none” author=””]पूरे प्रदेश में 8 लाख आरक्षण समर्थक कार्मिक बाबा साहब को अर्पित कर करेंगे श्रद्धासुमन[/penci_blockquote]
6 दिसम्बर को बाबा साहब डा0 भीम राव अम्बेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर पूरे प्रदेश में 8 लाख आरक्षण समर्थक कार्मिक आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र के आहवान पर विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी बाबा साहब को नमन करते हुए अपना श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति संयोजक मण्डल द्वारा प्रातः 8 बजे बाबा साहब डा. भीमराव अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन प्रतीक स्थल, गोमती नगर में बाबा साहब को श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे। पूरे प्रदेश के सभी संयोजकों को यह निर्देश दिये गये हैं कि वह बाबा साहब के बताये हुए रास्ते पर चलने के लिये समाज को जागरूक करें।

जिस प्रकार से आरक्षण विरोधी ताकतें बाबा साहब के नाम समाज को गुमराह कर रही हैं। उसके लिये सभी आरक्षण समर्थकों का यह कर्तव्य है कि वह बहुजन समाज को गुमराह होने से बचायें। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के संयोजकों अवधेश कुमार वर्मा, आरपी केन, अनिल कुमार, अजय कुमार, अन्जनी कुमार, प्रेम चन्द्र, रंजीत कुमार, दिनेश कुमार, जय प्रकाश, आनन्द कनौजिया सुनील कनौजिया ने कहा कि बाबा साहब द्वारा बनायी गयी संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा करने के लिये देश का आरक्षण समर्थक हर कुर्बानी देने के लिये तैयार रहेगा। बाबा साहब की बदौलत ही आज पूरे देश में बहुजन समाज को इज्जत, प्रतिष्ठा, शिक्षा और सम्मान मिला है, इसे पूरे देश के बहुजन समाज को बचा के रखना है।

बता दें कि डॉ. भीमराव आंबेडकर महापरिनिर्वाण दिवस हर साल देश के प्रति बाबा साहब के महान योगदान को मनाने के लिए नगर निगम और अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए राज्य सरकार के कर्मचारियों के संघ द्वारा एक समारोह का आयोजन करके मनाया जाता है। उनके महान प्रयास ने देश को एकजुट रखने में बहुत मदद की है। डॉ. भीमराव अम्बेडकर द्वारा लिखित भारत का संविधान अभी भी देश का मार्गदर्शन कर रहा है और आज भी ये कई संकटों के दौरान सुरक्षित रूप से बाहर उभरने में मदद कर रहा है। भारत सरकार द्वारा डॉ अंबेडकर फाउंडेशन (वर्ष 1992 में मार्च 24 को) स्थापित किया गया, ताकि पूरे देश में लोग सामाजिक न्याय का संदेश प्राप्त कर सकें।

उन्हें, ‘भारतीय संविधान का जनक’ कहा जाता है। भारत के लोग सुंदर ढंग से सजायी गयी प्रतिमा पर फूल, माला, दीपक और मोमबत्ती जलाकर और साहित्य की भेंट करके उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं। इस दिन लोगों की बड़ी भीड़ उन्हें सम्मान और आदर देने के लिये सुबह संसद भवन परिसर में आती है और एक सबसे प्रसिद्ध नारा ‘बाबा साहेब अमर रहें’ लगाते हैं। इस अवसर पर बौद्ध भिक्षु सहित कुछ लोग कई पवित्र गीत भी गाते हैं। उनके बेटे की पत्नी (पुत्र-वधू) मीरा ताई अम्बेडकर द्वारा 5 दिसंबर को आधी रात को समता सैनिक दल सलाम लिया जाता है। सलामी देने के बाद, उनकी शिक्षाओं को सस्वर पढ़ा जाता है और फिर स्तूप फाटक सभी के लिए खोल दिया जाता है।

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